केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, मखाना खेती और प्रोसेसिंग को मिलेगा नया आयाम

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

केंद्र सरकार ने मखाना किसानों और इससे जुड़े क्षेत्रों के विकास के लिए बड़ी पहल करते हुए ₹476.03 करोड़ की केंद्रीय योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी और इसके तहत मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात को संगठित व आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस फैसले से देश के पारंपरिक मखाना उत्पादक किसानों, खासकर बिहार और पूर्वी भारत के राज्यों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विकास की पूरी रूपरेखा यानी रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में राज्यों की वार्षिक कार्ययोजनाओं, बजट आवंटन, तकनीकी सहयोग और निगरानी व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि मखाना क्षेत्र को केवल कृषि तक सीमित न रखते हुए पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसानों को बेहतर कीमत और स्थायी आय मिल सके।

योजना के प्रमुख घटकों में मखाना की उन्नत किस्मों पर शोध, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन, खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रचार, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार शामिल है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाने पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे भारतीय मखाना वैश्विक स्तर पर पहचान बना सके।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को भी योजना का अहम हिस्सा बताया है। इसके तहत किसानों को वैज्ञानिक खेती, आधुनिक प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। क्लस्टर आधारित विकास मॉडल और सहकारी ढांचे के माध्यम से छोटे किसानों को संगठित कर उनकी उत्पादन लागत घटाने और आमदनी बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है।

सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल मखाना उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। प्रसंस्करण इकाइयों, स्टार्टअप्स और निर्यात गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा करेगा, ताकि तय लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके और किसानों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

Leave a Comment

और पढ़ें