राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने स्वदेशी मल्टी-लेयर इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह फैसला उस पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है, जब हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से भारतीय सीमाओं के पास हवाई गतिविधियों और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की साहसिक कोशिशों का पता चला था। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने आतंकवादी ठिकानों और सीमापार स्थित कुछ रणनीतिक टारगेट्स पर सटीक हमले किए थे, जिसके बाद दोनों देशों की हवाई सक्रियताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली जैसे उच्च-सुरक्षा क्षेत्र के लिए एक मजबूत, तेज प्रतिक्रिया देने वाली और पूरी तरह स्वदेशी एयर-डिफेंस प्रणाली की आवश्यकता अब अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
सरकार द्वारा तैनात किए जाने वाले इस नए स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सेटअप में DRDO द्वारा विकसित क्विक-रिएक्शन सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली (QRSAM), बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORAD), आधुनिक राडार, अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम और उन्नत निगरानी ढाँचे शामिल होंगे। यह प्रणाली इस तरह तैयार की जा रही है कि यह अलग-अलग ऊँचाई के स्तरों पर विभिन्न प्रकार के खतरों—चाहे वह ड्रोन हों, क्रूज मिसाइल हों, बालिस्टिक मिसाइल हों या तेज गति से आने वाले लड़ाकू विमान—का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सके। इस तैनाती से राजधानी क्षेत्र को एक बहु-स्तरीय ढाल प्राप्त होगी, जिससे किसी भी संभावित हवाई हमले को न सिर्फ रोकना बल्कि शुरुआती चरण में ही निष्क्रिय करना संभव हो सकेगा।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय स्वदेशी हथियार प्रणालियों, जैसे ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल सिस्टम, ने अपनी दक्षता और विश्वसनीयता साबित की थी। उन अभियानों में घरेलू तकनीक की सफलता ने यह भरोसा और मजबूत किया कि भारत अब न केवल प्रतिरोधक क्षमता बल्कि सक्रिय सुरक्षा चक्र में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजधानी की सुरक्षा के लिए इसी आत्मनिर्भरता को आधार बनाते हुए बहु-स्तरीय एयर डिफेंस की यह नई तैनाती अगले चरण की सुरक्षा-रणनीति का हिस्सा है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में इस तरह की उन्नत प्रणाली की तैनाती केवल तकनीकी निर्णय नहीं, बल्कि एक मजबूत रणनीतिक संदेश भी है—कि भारत किसी भी हवाई खतरे को जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही, इसके जरिए सुरक्षा ढाँचे में मौजूद संभावित कमजोरियों को दूर करने, प्रतिक्रिया समय को घटाने और स्वदेशी रक्षा तंत्र की क्षमता को अधिकतम करने का प्रयास किया जा रहा है। पूरे देश में बढ़ाई गई सुरक्षात्मक सतर्कता के साथ यह कदम राष्ट्रीय राजधानी को भविष्य के किसी भी हवाई खतरे से सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पहल माना जा रहा है।













