PRTC हड़ताल: यूनियन का संघर्ष जारी, प्रशासन के कदमों से बढ़ा रोष

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पंजाब में आज पनबस और Pepsu Road Transport Corporation (PRTC) के कर्मचारियों ने राज्यव्यापी हड़ताल करते हुए बस सेवा पूरी तरह बंद कर दी। यह चक्का जाम उस समय हुआ जब पुलिस ने कई यूनियन नेताओं को हिरासत में लिया। कर्मचारियों और यूनियन का आरोप है कि यह कार्रवाई उन्हें शांत कराने और विरोध को दबाने के लिए की गई। हड़ताल का मुख्य कारण सरकार द्वारा प्रस्तावित “किलोमीटर स्कीम” है, जिसके तहत निजी बस ऑपरेटरों को राज्य की बस सेवाओं की जिम्मेदारी सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। यूनियन ने इसे सार्वजनिक परिवहन का निजीकरण बताते हुए कर्मचारियों की नौकरियों और भविष्य पर संकट मानते हुए विरोध किया।

आज सुबह से पंजाब के सभी प्रमुख बस स्टैंडों में बसें खड़ी रहीं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। जालंधर, पटियाला, अमृतसर, फिरोजपुर समेत अन्य शहरों में बसों का संचालन बंद रहने के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, और स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। यूनियन का कहना है कि गिरफ्तार नेता रिहा किए जाने और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा किए बिना बस सेवा बहाल नहीं की जाएगी।

हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की संख्या लगभग 8,000 बताई जा रही है। यूनियन ने नियमित भर्ती, वेतन व पेंशन में समानता, बकाया भुगतान और अन्य पुराने मुद्दों के समाधान की मांग की है। प्रशासन ने कहा है कि गिरफ्तारियों और तलाशी कार्रवाई का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन इससे कर्मचारियों और यूनियन में रोष और बढ़ गया है। इस आंदोलन ने आम जनता को भी प्रभावित किया है, क्योंकि रोज़मर्रा के काम, स्कूल, ऑफिस और अन्य यात्रा योजनाएं बाधित हुई हैं।

यह हड़ताल स्पष्ट संदेश देती है कि कर्मचारी सरकार की निजीकरण योजनाओं और कर्मचारियों के भविष्य पर उठाए जा रहे कदमों के खिलाफ गंभीर असंतोष में हैं। यूनियन का कहना है कि केवल आश्वासन या योजनाओं को स्थगित करना उन्हें संतुष्ट नहीं करेगा और जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, संघर्ष जारी रहेगा। यदि सरकार समय पर पहल नहीं करती है, तो इससे राज्य की परिवहन व्यवस्था और आम जनता का विश्वास दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

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