नई दिल्ली: ट्रेड फ़ेयर 2025 के इस वीकेंड पर बिहार पवेलियन लोगों की भारी भीड़ और ज़बरदस्त उत्साह का केन्द्र बना रहा। बिहार को इस बार दर्शकों से बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिली—चाहे वह हैंडलूम हो, हैंडमेड उत्पाद हों या जीविका दीदियों के स्वदेशी हैंड मेड उत्पाद। पवेलियन में बिहार के स्टॉल्स पर उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि देशभर के लोग बिहार की कला, संस्कृति और उनके उत्पादों को कितने मन से अपनाते और सराहते हैं।

जीविका की उद्यमी आमना खातून (शिवहर, बिहार) अपनी अनोखी लाख की चूड़ियों के कारण सबसे ज़्यादा चर्चा में रहीं। 2015 से शुरू किए गए उनके इस कार्य में फोटो प्रिंटिंग, नाम उकेरने (इंग्रेविंग) जैसी आकर्षक डिज़ाइन शामिल हैं, और कीमत 250 से 700 रुपये तक है। वहीं भागलपुर की दाशो देवी की शुद्ध सिल्क की साड़ियाँ और सूट (400 से 9000 रुपये) ने पवेलियन की शान बढ़ाई। इसी प्रकार नवादा की रंजीला देवी द्वारा लाई गई शुद्ध सिल्क और कॉटन की साड़ियाँ–सूट भी बेहद पसंद किए गए, जिनमें बिहार की पारंपरिक बुनाई की खूबसूरती साफ़ नज़र आई। हर स्टॉल पर लोगों की भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि बिहार के वस्त्र और हस्तशिल्प लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं।

साथ ही बिहार खादी के सिमरन के स्टॉल पर महिलाओं द्वारा बनाए गए मधुबनी और मिथिला प्रिंट वाले हैंडबैग और साइड बैग्स पवेलियन के आकर्षण का एक प्रमुख हिस्सा बने। बैग्स पर की गई पारंपरिक आर्ट ने इन्हें एक आधुनिक और सांस्कृतिक मिश्रित रूप दिया—जिसे युवा और महिलाएँ दोनों खूब पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, आख़िरी वीकेंड में बिहार पवेलियन को जिस तरह का रिस्पॉन्स मिला, वह न सिर्फ़ उत्साहजनक है बल्कि यह स्पष्ट संदेश देता है कि बिहार की कला, मेहनत और परंपरा आज पूरे देश का ध्यान आकर्षित













