नई दिल्ली: प्रसिद्ध लद्दाखी पर्यावरणविद्, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 17वें दिन पहुंच गए हैं। जंतर मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने करीब 8.5 किलोग्राम वजन कम कर लिया है और ब्लड शुगर लेवल 67 तक गिर गया है।
घटनाक्रम और मांगें…
सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले जंतर मंतर पर अनशन पर बैठे हैं। मुख्य मांगें:
परीक्षा पेपर लीक (NEET-UG सहित) के मामलों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
छात्रों को न्याय दिलाना और परीक्षा प्रणाली में सुधार।
लद्दाख को विशेष दर्जा (Sixth Schedule) देने संबंधी पुरानी मांगों का भी समर्थन।
आंदोलन के दौरान कई छात्र और समर्थक भी उनके साथ अनशन पर हैं। विपक्षी नेताओं जैसे अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव ने समर्थन जताया है लेकिन अनशन समाप्त करने की अपील की है।
स्वास्थ्य स्थिति
समर्थकों के अनुसार 17वें दिन वांगचुक की हालत चिंताजनक हो गई है। उन्होंने 8.5 किलो वजन गंवाया है। चिकित्सकीय चिंताओं के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें उन्हें सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कर मेडिकल देखभाल और जरूरत पड़ने पर फोर्स-फीडिंग (तरल आहार) की मांग की गई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने 16 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई तय की है। याचिकाकर्ता वकील राकेश कुमार सैनी ने सरकार की जिम्मेदारी पर जोर दिया कि नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना उसका कर्तव्य है।
आगे की योजना
आंदोलनकारियों ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च का ऐलान किया है। वांगचुक सरकार से संवाद की मांग करते हुए अनशन जारी रखने पर अड़े हैं।












