नई दिल्ली, 13 जून 2026: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने महज 48-72 घंटों में तीन बड़े मिसाइल टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दी है। इन टेस्टों ने भारत को बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के क्षेत्र में अमेरिका, रूस और इजराइल जैसे देशों वाले एलीट क्लब में शामिल कर दिया है।
प्रमुख उपलब्धियां:…
AD-1 और AD-2 इंटरसेप्टर मिसाइलों का सफल टेस्ट: 10 और 11 जून को चंडीपुर (ओडिशा) स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किए गए इन टेस्टों में DRDO ने मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम को वैलिडेट किया। ये इंटरसेप्टर मिसाइलें MRBM से लेकर IRBM (5000 किमी रेंज तक) और ICBM-क्लास बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम हैं।
AD-1: एक्सो-एटमॉस्फेरिक (बाहर के वातावरण) इंटरसेप्शन
AD-2: एंडो-एटमॉस्फेरिक (भीतर के वातावरण) इंटरसेप्शन
NASM-MR (Naval Anti-Ship Missile-Medium Range): पहली बार सफल फ्लाइट टेस्ट, जो नौसेना को दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला करने की क्षमता देगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन सफलताओं पर DRDO, भारतीय सेना और नौसेना को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये टेस्ट भारत की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव की क्षमता को मजबूत करते हैं और आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में बड़ा कदम हैं।
महत्व:
भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो ICBM-क्लास खतरे को हवा में ही रोक सकते हैं।
ये टेस्ट क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों (चीन और पाकिस्तान) के मद्देनजर भारत की रणनीतिक deterrence को बढ़ाएंगे।
सभी सिस्टम स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं।
DRDO के इन टेस्टों ने पूरे देश में गर्व और उत्साह का माहौल बना दिया है। पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट और डेटा का विश्लेषण जारी है।












