पर्यावरण-अनुकूल रेल यात्रा की शुरुआत, जींद–सोनीपत के बीच चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन

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भारतीय रेलवे पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन हरियाणा में जींद से सोनीपत के बीच संचालित की जाएगी। यह ट्रेन डीजल या बिजली की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होगी, जिससे न तो धुआं निकलेगा और न ही कार्बन उत्सर्जन होगा। रेलवे के अनुसार यह परियोजना ग्रीन मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग है।

हाइड्रोजन ट्रेन का यह रूट लगभग 89 किलोमीटर लंबा होगा। यह ट्रेन जींद जंक्शन से चलकर जींद सिटी, पांडु-पिंडारा जंक्शन, भंभेवा, गोहाना जंक्शन और मोहाना होते हुए सोनीपत जंक्शन तक पहुंचेगी। इस तरह कुल सात स्टेशन इस रूट पर शामिल होंगे। यह रूट यात्रियों की रोजमर्रा की आवाजाही के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र औद्योगिक और शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।

रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेन का किराया भी आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए काफी किफायती रखा है। शुरुआती स्टेशनों के लिए किराया 5 रुपये से शुरू होगा, जबकि जींद से सोनीपत तक पूरे सफर का अधिकतम किराया 25 रुपये तय किया गया है। कम किराए के कारण यह ट्रेन छात्रों, कर्मचारियों और दैनिक यात्रियों के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

समय और गति के लिहाज से भी यह ट्रेन मौजूदा ट्रेनों से कहीं बेहतर होगी। जहां अभी जींद से सोनीपत का सफर करीब दो घंटे में पूरा होता है, वहीं हाइड्रोजन ट्रेन यह दूरी लगभग एक घंटे में तय करेगी। ट्रेन की अधिकतम गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है, जिससे यात्रा न केवल तेज बल्कि आरामदायक भी होगी।

तकनीकी रूप से यह ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। एक बार में यह ट्रेन लगभग 2500 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी। बताया गया है कि करीब 360 किलोग्राम हाइड्रोजन में यह ट्रेन लगभग 180 किलोमीटर तक चल सकती है। इसके कोच चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार किए गए हैं और सुरक्षा मानकों के अनुसार इसके परीक्षण पूरे किए जा रहे हैं।

रेलवे की योजना के अनुसार सभी ट्रायल सफल रहने के बाद इस हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन जनवरी 2026 के अंत तक शुरू किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रूट्स पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन का रास्ता खोल सकती है। इस तरह भारत स्वच्छ, टिकाऊ और आधुनिक रेल परिवहन की दिशा में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।

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