चीन और ताइवान के बीच सीमा पर तनाव में लगातार वृद्धि हो रही है। चीन ने 29 दिसंबर 2025 से व्यापक सैन्य अभ्यास ‘जस्टिस मिशन 2025’ शुरू किया है, जिसमें वायुसेना, नौसेना, मिसाइल बल और थल सेना की संयुक्त शक्ति शामिल है। इस अभ्यास के दौरान लाइव‑फायर ड्रिल, मिसाइल परीक्षण और समुद्री तथा हवाई नियंत्रण के विभिन्न अभ्यास किए जा रहे हैं। चीनी सेना ने ताइवान के चारों ओर कई जोन घोषित किए हैं, जहाँ मिसाइलें और रॉकेट फायर किए गए हैं। चीनी कमांडर का कहना है कि यह अभ्यास “बाहरी हस्तक्षेप और अलगाववादी ताकतों को चेतावनी” देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
सैन्य गतिविधियों के कारण ताइवान में हवाई और समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं। लगभग 941 उड़ानों में देरी या रद्दी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ा। ताइवान के किनमें और माटसू जैसे द्वीपों के लिए उड़ानें रद्द की गईं, जिससे लगभग एक लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। इसके साथ ही मछुआरों की रोजमर्रा की गतिविधियाँ भी बाधित हुईं, क्योंकि उन्हें अभ्यास क्षेत्र और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना पड़ रहा है।
अभ्यास के तीसरे दिन चीन ने ताइवान के आसपास 130 से अधिक विमानों और 14 नौसेना जहाजों को तैनात किया। कई विमानों ने ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा पार की, जो पहले के मुकाबले हवाई क्षेत्र में काफी घुसपैठ मानी जा रही है। चीन ने एंटी‑सबमरीन संचालन का भी अभ्यास किया, जो इसके अभ्यास की व्यापकता को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अभ्यास को लेकर चिंता जताई जा रही है। यह अमेरिकी द्वारा ताइवान को दिए गए बड़े हथियार सौदे के कुछ ही दिनों बाद हुआ, जिसे बीजिंग ने बाहरी हस्तक्षेप के रूप में देखा। ताइवान ने अपनी सेनाओं को हाई अलर्ट पर रखा है और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है। रूस ने चीन के रुख का समर्थन करते हुए ताइवान को चीन का “अविभाज्य भाग” बताया।
विश्लेषकों के अनुसार, चीन का यह अभ्यास अब तक का सबसे बड़ा सैन्य प्रदर्शन है, जिसने न केवल ताइवान की सुरक्षा स्थिति को तनावपूर्ण किया है, बल्कि सामान्य लोगों की यात्राओं और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित किया है। ‘जस्टिस मिशन 2025’ अभ्यास से क्षेत्रीय संतुलन और भविष्य के सुरक्षा परिदृश्यों पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है।













