मनरेगा को कमजोर करने का आरोप: कांग्रेस का बड़ा ऐलान, देशभर में चलेगा बचाओ अभियान

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए देशभर में ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू करने का एलान किया है। यह अभियान 5 जनवरी 2026 से पूरे देश में चलाया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के बाद इसकी घोषणा की। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर किए जाने और उसे नए कानून VB-G RAM G से बदलने के फैसले के विरोध में शुरू किया जा रहा है।

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में पारित नए कानून के जरिए 20 साल पुराने मनरेगा कानून की मूल भावना को खत्म कर दिया है। पार्टी के अनुसार मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों और मजदूरों को रोजगार की कानूनी गारंटी देने वाला अधिकार आधारित कानून था। कांग्रेस का दावा है कि नए प्रावधानों से राज्यों की भूमिका सीमित होगी और ग्रामीण मजदूरों के रोजगार अधिकार कमजोर पड़ेंगे।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण भारत को आर्थिक संबल दिया और लाखों परिवारों को कठिन समय में सहारा मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना व्यापक चर्चा और राज्यों से सलाह लिए यह फैसला लिया, जो गरीब विरोधी और संघीय ढांचे के खिलाफ है। खरगे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और इसे जन आंदोलन का रूप देगी।

राहुल गांधी ने भी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मनरेगा देश के सबसे गरीब और कमजोर वर्ग के लिए जीवनरेखा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के फैसले से ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर चोट पहुंची है। राहुल गांधी ने इस कदम की तुलना नोटबंदी जैसे फैसलों से करते हुए कहा कि इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम होंगे और कांग्रेस जनता के बीच जाकर इसका विरोध करेगी।

कांग्रेस के अनुसार ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ के तहत गांव-गांव जाकर लोगों को नए कानून के प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ता ग्रामीण इलाकों में सभाएं, पदयात्राएं और प्रदर्शन करेंगे। साथ ही राज्य स्तर पर आंदोलन को मजबूत करने के लिए स्थानीय संगठनों, मजदूर वर्ग और किसानों को जोड़ा जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के रोजगार और सम्मान की लड़ाई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनरेगा से जुड़ा यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है, क्योंकि इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों परिवारों की आजीविका पर पड़ता है। ऐसे में कांग्रेस का यह देशव्यापी अभियान केंद्र सरकार के लिए सियासी चुनौती बन सकता है।

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