देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में राज्यहित से जुड़े कुल 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देना, किसानों और उद्योगों को राहत पहुंचाना तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। कैबिनेट के निर्णयों को राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
कैबिनेट का सबसे प्रमुख फैसला सरकारी कर्मचारियों के कैशलैस इलाज से जुड़ा रहा। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के इलाज में सरकार द्वारा दिए जाने वाले अंशदान को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। आयुष्मान और अटल आयुष्मान योजनाओं को पूरी तरह इंश्योरेंस मोड में संचालित किया जाएगा, जबकि गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड में लागू किया जाएगा। इसके तहत पांच लाख रुपये तक के इलाज का खर्च इंश्योरेंस के माध्यम से और उससे अधिक राशि ट्रस्ट मोड से दी जाएगी। अंशदान बढ़ने से कर्मचारियों को बिना आर्थिक चिंता के बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी।
वित्तीय मोर्चे पर राहत देते हुए कैबिनेट ने प्राकृतिक गैस पर लगने वाले वैट को 20 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का फैसला किया है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों को भी सीधा लाभ मिलेगा और ऊर्जा लागत में कमी आएगी। यह निर्णय राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक माना जा रहा है।
किसानों के हित में सरकार ने आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। रॉयल डिलिशियस सेब का मूल्य 51 रुपये प्रति किलो और रेड डिलिशियस सेब का मूल्य 45 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों के सेब उत्पादक किसानों को उचित दाम मिलने की उम्मीद है और उनकी आय में स्थिरता आएगी।
संस्कृति और कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने कलाकारों और लेखकों की मासिक पेंशन को 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये करने का निर्णय लिया है। इससे वर्षों से कला और साहित्य के क्षेत्र में योगदान दे रहे रचनाकारों को आर्थिक सहारा मिलेगा और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने निम्न जोखिम वाले भवनों और व्यावसायिक निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया है। अब एम्पैनल्ड आर्किटेक्ट के माध्यम से नक्शा स्वीकृत कराने की अनुमति दी गई है, जिससे निर्माण कार्य में समय और औपचारिकताओं में कमी आएगी।
उद्योग और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए एमएसएमई इकाइयों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। ग्राउंड कवरेज बढ़ाने के साथ-साथ बांस और रेशा विकास परिषद के ढांचे में संशोधन तथा तकनीकी कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। साथ ही सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत करने और हल्द्वानी स्थित स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में नए पद सृजित करने का निर्णय लिया गया है।
दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता देने की अनुमति दी गई है। इस फैसले से लगभग 300 डॉक्टरों को लाभ मिलेगा और दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में समान कार्य के लिए समान वेतन से जुड़े 277 कर्मचारियों के मामले को कैबिनेट उपसमिति को सौंप दिया गया है, ताकि इस पर विस्तृत अध्ययन के बाद न्यायसंगत निर्णय लिया जा सके। इसी तरह उपनल कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों को भी मंत्रिमंडल उपसमिति के हवाले किया गया है।
इसके अलावा, सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के वर्क-चार्ज कर्मचारियों को पेंशन का लाभ देने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और उनका भविष्य सुरक्षित होगा।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड कैबिनेट के ये फैसले स्वास्थ्य, कृषि, कर्मचारी कल्याण, उद्योग और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में सरकार की सक्रिय और जनहितकारी सोच को दर्शाते हैं। कैशलैस इलाज से लेकर किसानों और कर्मचारियों को राहत देने तक, ये निर्णय राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले माने जा रहे हैं।













