पायलट संगठन FIP ने उठाई सुरक्षा की चिंता, नियमों में ढील का किया विरोध

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फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने विमानन सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने गंभीर चिंता जताई है। पायलट संगठन ने नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि देश में विमानन सुरक्षा पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए और एयरलाइंस को दी गई सभी प्रकार की छूट और रियायतें तत्काल वापस ली जाएं। FIP का कहना है कि व्यावसायिक दबाव या परिचालन सुविधा के नाम पर सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर यात्रियों और क्रू की जान पर पड़ सकता है।

अपने पत्र में FIP ने विशेष रूप से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों का उल्लेख किया है। ये नियम पायलटों की थकान को कम करने और उन्हें पर्याप्त आराम देने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं, ताकि उड़ानों के दौरान सतर्कता बनी रहे। संगठन का आरोप है कि इन नियमों के बावजूद कुछ एयरलाइंस को विशेष छूट दी गई है, जिससे पायलटों की ड्यूटी अवधि बढ़ जाती है और आराम का समय घटता है। FIP का मानना है कि ऐसे निर्णय अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों के खिलाफ हैं।

FIP ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश की कई प्रमुख एयरलाइंस के पास पर्याप्त संख्या में पायलट और तकनीकी स्टाफ मौजूद हैं, इसके बावजूद नियमों में ढील दी जा रही है। संगठन का कहना है कि यह छूट सुरक्षा की बजाय व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता देने का संकेत देती है। पायलटों के अनुसार, लगातार लंबी ड्यूटी और अपर्याप्त विश्राम न केवल उड़ान संचालन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।

पत्र में सरकार और नियामक संस्था डीजीसीए से यह भी मांग की गई है कि किसी भी एयरलाइन को नए विमान शामिल करने या नई उड़ानों की अनुमति तभी दी जाए, जब उसके पास पर्याप्त पायलट, केबिन क्रू, इंजीनियर, ग्राउंड स्टाफ और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो। FIP ने जोर देकर कहा है कि तेज़ी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर हादसों का कारण बन सकता है।

पायलट संगठन का कहना है कि भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे समय में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन और पायलटों की कार्यस्थितियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। FIP ने सरकार से आग्रह किया है कि वह सभी एयरलाइंस के लिए समान नियम लागू करे और किसी भी तरह की अस्थायी या विशेष छूट को समाप्त करे।

कुल मिलाकर, FIP का यह पत्र सरकार के लिए एक स्पष्ट चेतावनी और सुझाव दोनों है कि विमानन क्षेत्र में विकास के साथ-साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। संगठन का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा यात्रियों और पूरे विमानन उद्योग को भुगतना पड़ सकता है।

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