ISIS पर अमेरिका की करारी चोट, सीरिया में एक साथ दर्जनों ठिकानों पर हवाई हमले

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अमेरिका ने सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने सीरिया के मध्य और पूर्वी इलाकों में स्थित आतंक के अड्डों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इस सैन्य अभियान में ISIS से जुड़े 70 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें आतंकियों के ठहरने के स्थान, हथियार भंडार, प्रशिक्षण शिविर और लॉजिस्टिक केंद्र शामिल थे।

यह कार्रवाई हाल ही में अमेरिकी सैनिकों पर हुए जानलेवा हमले के जवाब में की गई है। कुछ दिन पहले सीरिया के पाल्मायरा क्षेत्र के पास अमेरिकी बलों पर घात लगाकर हमला किया गया था, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिये की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि इस हमले के पीछे ISIS से जुड़े आतंकियों का हाथ था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया गया।

अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन को “ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक” नाम दिया है। हमलों के दौरान अत्याधुनिक सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें एफ-15 और ए-10 लड़ाकू विमान, अपाचे हेलीकॉप्टर और HIMARS रॉकेट सिस्टम शामिल हैं। कुछ सहयोगी देशों की सेनाओं ने भी इस अभियान में तकनीकी और हवाई समर्थन प्रदान किया। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, हमले बेहद सटीक थे ताकि आतंकियों को अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सके और आम नागरिकों को नुकसान न हो।

अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ISIS की सैन्य क्षमता को पूरी तरह कमजोर करना और उसके दोबारा संगठित होने की कोशिशों को रोकना है। अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में ISIS ने सीरिया के कुछ इलाकों में फिर से सक्रिय होने के संकेत दिए थे, जिसे देखते हुए यह हमला जरूरी माना गया। अमेरिका फिलहाल सीरिया में करीब एक हजार सैनिक तैनात किए हुए है, जो आतंकवाद विरोधी अभियानों में स्थानीय बलों का समर्थन कर रहे हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को आतंकवाद के खिलाफ “कड़ा और निर्णायक जवाब” बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों को निशाना बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह हमला किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं है, बल्कि केवल आतंकवादी संगठन ISIS के खिलाफ सीमित और लक्षित कार्रवाई है।

इस सैन्य अभियान के बाद मध्य पूर्व में सुरक्षा हालात को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। हालांकि अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए जरूरी थी। अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि भविष्य में उसके बलों पर किसी तरह का हमला होता है, तो इसी तरह की सख्त जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

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