पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। पार्टी की पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू के हालिया आरोपों ने संगठन के भीतर तीखी बहस छेड़ दी है। टिकट वितरण, पदों के चयन और पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर उठाए गए उनके सवालों ने प्रदेश नेतृत्व को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सिद्धू ने यह आरोप लगाया कि प्रदेश संगठन में कुछ फैसले प्रभावशाली नेताओं के इशारों पर लिए जाते हैं और पदों के बदले बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन की संस्कृति विकसित हो चुकी है। इन आरोपों से असंतोष की लहर फैली, जिसके बाद कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें निलंबित करने की कार्रवाई की। हालांकि सिद्धू अपने बयानों पर कायम हैं और उन्होंने कहा है कि वह पार्टी के भीतर की अनियमितताओं को उजागर करने से पीछे नहीं हटेंगी।
उधर, सिद्धू के आरोपों से आहत कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजकर विवाद को नया मोड़ दे दिया है। रंधावा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह अपनी छवि पर हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे और अब अदालत में ही इस मामले का निपटारा करेंगे। उन्होंने नवजोत कौर से बिना शर्त माफी की मांग की है। रंधावा का कहना है कि मीडिया रिपोर्टों या अनुमान के आधार पर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है। नवजोत कौर ने कानूनी नोटिस को “दबाव बनाने का तरीका” बताया और संकेत दिया कि वह अपनी बात अदालत में भी साबित करने को तैयार हैं। इससे विवाद एक राजनीतिक बहस से बढ़कर कानूनी जंग में तब्दील होता दिख रहा है।
इस बीच, पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेता और पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की है। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इस पूरे विवाद की रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। प्रदेश नेतृत्व ने भी दोनों पक्षों से संयम की अपील की है, क्योंकि यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी आने वाले वर्षों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने इस विवाद को जल्द और पारदर्शी तरीके से नहीं सुलझाया, तो इसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है। फिलहाल, पंजाब कांग्रेस का यह आंतरिक संघर्ष संगठन की छवि, नेतृत्व और चुनावी रणनीति—तीनों पर गहरा असर डाल रहा है, जबकि रंधावा और नवजोत कौर सिद्धू दोनों अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।













