भारत को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के लिए 2026 से 2028 की अवधि के लिए निर्विरोध रूप से चुने जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसे देश की बढ़ती वैश्विक साख और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अंतरराष्ट्रीय भरोसे का संकेत बताया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कहा कि यह चुनाव भारत की उस प्रतिबद्धता की पुष्टि है, जिसके तहत देश मानवाधिकारों की रक्षा, नागरिक स्वतंत्रताओं को सुरक्षित रखने और मानव-गरिमा को सर्वोपरि रखने के लिए निरंतर कार्य करता रहा है। सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा भारत के लोकतांत्रिक ढांचे, नीति-निर्माण और सार्वजनिक कल्याण कार्यक्रमों में बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण करार दिया है।
मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने इस उपलब्धि को “भारत की लोकतांत्रिक ताकत पर दुनिया की मुहर” बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों द्वारा भारत को मिले व्यापक समर्थन से स्पष्ट है कि वैश्विक जगत हमारे संवैधानिक आदर्शों, सुधारवादी नीतियों और अधिकार-आधारित विकास मॉडल को स्वीकार कर रहा है। मिश्रा ने यह भी रेखांकित किया कि भारत का मानवाधिकार दृष्टिकोण केवल संवैधानिक दायित्वों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समावेशिता और जनता तक सेवाओं की पारदर्शी पहुँच को भी प्राथमिकता देता है।
चुनाव के बाद विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व ने सदस्य देशों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत अपनी आगामी कार्यावधि में मानवाधिकार संवाद को और मजबूत करेगा तथा वैश्विक सहयोग के नए रास्ते खोलेगा। सरकार का मानना है कि UNHRC जैसे महत्वपूर्ण मंच पर सदस्यता हासिल करना भारत को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में सक्रिय भूमिका निभाने, वैश्विक मानवाधिकार एजेंडों को आकार देने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि भारत की कूटनीतिक स्थिति को भी मजबूत करती है और भविष्य के बहुपक्षीय संवादों में देश की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित करेगी।













