शशि थरूर ने ‘वीर सावरकर अवॉर्ड’ ठुकराया, आयोजकों की घोषणा को बताया गैर-जिम्मेदाराना

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड को ठुकराते हुए साफ किया कि उन्होंने न तो इस सम्मान को स्वीकार किया है और न ही किसी समारोह में शामिल होने की सहमति दी थी। थरूर ने बताया कि वे केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में व्यस्त थे, तभी मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर सामने आई कि उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है। उन्होंने आयोजकों की ओर से बिना पूर्व अनुमति और जानकारी के उनका नाम घोषित किए जाने को “पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हरकत” बताया। थरूर ने कहा कि न सम्मान के आयोजकों की जानकारी उन्हें दी गई और न ही पुरस्कार की प्रकृति स्पष्ट की गई, ऐसे में किसी भी कार्यक्रम में शामिल होना संभव ही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे “न तो यह अवॉर्ड लेंगे और न ही कार्यक्रम में शामिल होंगे।”

थरूर के रुख को कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं का भी समर्थन मिला। वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने कहा कि किसी भी कांग्रेस नेता को ऐसे सम्मान स्वीकार नहीं करने चाहिए जो उस व्यक्ति के नाम पर हों जिसकी विचारधारा और ऐतिहासिक भूमिका पर पार्टी पहले से सवाल उठाती रही है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब थरूर ने संकेत दिया कि वे सावरकर की विचारधारा से असहमत हैं और इतिहास में दर्ज कुछ दस्तावेज़ों के आधार पर उनकी ब्रिटिश शासन से जुड़े कदमों पर सवाल उठाते हैं। थरूर के कड़े बयान के बाद आयोजनकर्ताओं की भूमिका पर और भी सवाल खड़े हुए हैं कि बिना सहमति किसी सांसद या जनप्रतिनिधि का नाम सार्वजनिक रूप से कैसे घोषित किया जा सकता है।

पूरा मामला सामने आने के बाद यह राजनीतिक बहस का विषय बन गया है, जिसमें एक ओर आयोजकों पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर थरूर ने कांग्रेस की विचारधारा और अपने व्यक्तिगत रुख को दोहराते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी ऐसे सम्मान का हिस्सा नहीं बन सकते जो उनके सिद्धांतों और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से मेल नहीं खाता। उनकी प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है और आयोजन से जुड़े पक्षों पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

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