देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानून पॉक्सो (POCSO) एक्ट के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसके प्रावधानों का इस्तेमाल कई बार वैवाहिक विवादों और किशोरों के सहमति-आधारित रिश्तों में गलत तरीके से किया जा रहा है। न्यायालय ने कहा कि इस तरह के मामलों से कानून के उद्देश्य पर आंच आती है और यह वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय की राह को भी मुश्किल बना सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज में पॉक्सो कानून को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि केवल कठोर दंड से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि बच्चों, अभिभावकों और युवाओं को इस कानून के प्रावधानों और उनकी कानूनी जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करना अधिक प्रभावी होगा। न्यायालय ने केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कहा है कि वे समाज में इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएँ और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाएँ।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कई मामलों में पॉक्सो की धाराओं का इस्तेमाल वैवाहिक झगड़ों या प्रेम संबंधों में हथियार की तरह किया जा रहा है। इससे न केवल निर्दोष लोग परेशान होते हैं, बल्कि अदालतों का बोझ भी बढ़ता है। इसलिए न्यायालय ने सभी राज्यों को सुझाव दिया कि स्कूलों, कॉलेजों और समाज के स्तर पर ऐसे अभियान चलाए जाएँ जो युवाओं को सही जानकारी दें और उन्हें कानून की मर्यादा का बोध कराएँ।
बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार से रिपोर्ट तलब करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाए गए कानूनों को केवल सजा देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित करने का साधन बनाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉक्सो का मूल उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग बढ़ता गया तो कानून पर लोगों का भरोसा कम हो सकता है। इसलिए जागरूकता, शिक्षा और संवेदनशीलता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।
इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी, जिसमें केंद्र सरकार और अन्य एजेंसियों से पॉक्सो कानून के प्रचार, प्रशिक्षण और दुरुपयोग की रोकथाम से जुड़े प्रयासों पर जवाब मांगा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में पॉक्सो कानून के सही उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्कूल पाठ्यक्रम, पुलिस प्रशिक्षण और मीडिया के माध्यम से सरल भाषा में जानकारी देना समय की जरूरत है।













