नई दिल्ली: केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के विभिन्न स्टोर्स में हुई जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं और लापरवाहियां सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 5 फार्मासिस्टों और 2 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है और सरकारी व्यवस्था के किसी भी स्तर पर अनियमितता को सहन नहीं किया जाएगा।
जांच में क्या सामने आया?
जांच टीम ने सीपीए के स्टोर्स में दवाओं की खरीद, भंडारण और प्रबंधन से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं पाईं। इनमें संभावित अनियमित खरीद, स्टोरेज में लापरवाही और अन्य प्रशासनिक खामियां शामिल बताई जा रही हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इन लापरवाहियों की पुष्टि होने के बाद तुरंत निलंबन की कार्रवाई की गई।
रेखा गुप्ता ने कहा, “जनता के हितों से जुड़े स्वास्थ्य सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।”
सरकार का संदेश…
यह कार्रवाई दिल्ली सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग और खरीद प्रक्रियाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पहले भी सीपीए में बड़े स्तर पर स्टाफ ट्रांसफर और री-ऑर्गनाइजेशन के आदेश दिए थे ताकि दवाओं की खरीद और सप्लाई में पारदर्शिता बढ़े।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे और जांच जारी रहेगी और यदि कोई बड़ा घोटाला या भ्रष्टाचार पाया गया तो अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।












