चमोली टनल हादसा: विष्णुगाड़-पीपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में पानी-मलबा घुसने से 7 मजदूरों की मौत

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उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी (मायापुर) क्षेत्र में टीएचडीसी (Tehri Hydro Development Corporation) की 444 मेगावाट विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टेल रेस टनल (TRT) में गुरुवार, 13 अगस्त 2026 शाम करीब 6:45 से 7 बजे के बीच बड़ा हादसा हो गया। अचानक कैविटी फटने या भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में पानी और मलबा सुरंग में घुस गया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर फंस गए।

हादसे का विवरण

हादसा सुरंग के मुहाने से करीब 1.5 से 1.8 किलोमीटर अंदर हुआ। सुरंग की कुल लंबाई लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर बताई जा रही है।

उस समय शिफ्ट में 22 से 28 मजदूर काम कर रहे थे। ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और स्थानीय इलाकों से थे।

अचानक जोरदार धमाके जैसी आवाज के साथ पानी और मलबा तेजी से भरा। गले तक पानी और गाद भर जाने से रेस्क्यू मुश्किल हो गया। ऑक्सीजन की कमी और दलदली स्थिति के कारण रात में अभियान कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।

मौजूदा स्थिति (14 अगस्त 2026 तक)

अब तक 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

19 से 21 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।

3 मजदूर अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।

घायलों में 10-14 मजदूर जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती हैं। कुछ की हालत गंभीर होने पर श्रीनगर या अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया है। एक घायल को छुट्टी भी दे दी गई है।1

मृतकों में टिहरी के प्रदीप पंवार, चमोली के मुकेश सिंह, बिहार/झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ मजदूर शामिल बताए जा रहे हैं।

रेस्क्यू और प्रशासनिक कार्रवाई

NDRF, SDRF, ITBP, सेना, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं। पानी निकालने के लिए बड़े पंप लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पहुंचे, रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया और घायलों से मिलने अस्पताल भी गए। उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी बात की। मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की गई है।

परियोजना का करीब 70% काम पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य एचसीसी (Hindustan Construction Company) द्वारा किया जा रहा है।

नोट: आंकड़े बदल सकते हैं क्योंकि रेस्क्यू अभियान जारी है। आधिकारिक अपडेट के लिए स्थानीय प्रशासन या राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पर नजर रखें।

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