नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र 2026 का चौथा दिन (23 जुलाई) भी NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ गया। पिछले तीन दिनों से लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखा आमना-सामना जारी है। विपक्षी सांसद नारेबाजी कर वेल ऑफ द हाउस तक पहुंच गए, काले कपड़े पहनकर विरोध जताया और कार्यवाही बार-बार स्थगित करानी पड़ी।
क्या है विवाद का मूल मुद्दा?
NEET-UG 2026 परीक्षा (मई 2026 में आयोजित) में कथित पेपर लीक के आरोप लगे थे। NTA ने परीक्षा रद्द कर री-टेस्ट कराया। विपक्ष का आरोप है कि सिस्टम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई, छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और कुछ मामलों में आत्महत्याएं भी हुईं। जंतर मंतर पर CJP (Cockroach Janta Party) और छात्रों के प्रदर्शन जारी हैं। पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विपक्ष नाराज है।
विपक्ष की मुख्य मांगें:
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
NEET मुद्दे पर तुरंत चर्चा (Rule 267 या स्थगन प्रस्ताव के तहत)
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही
छात्रों के परिवारों को मुआवजा
सरकार का रुख:
NEET मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की कोई बात नहीं (सरकार का कहना है कि मंत्री व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं)
विपक्ष मुद्दे को राजनीतिक बना रहा है और चर्चा से बच रहा है
JP नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार दिन-रात चर्चा को तैयार है, लेकिन शर्तों पर नहीं
सदन में क्या हुआ?
लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन शोर-शराबे के कारण बार-बार स्थगन करना पड़ा।
राज्यसभा में भी मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेताओं ने प्रधान के इस्तीफे के बाद ही चर्चा की शर्त रखी।
दोनों सदनों में पिछले दिनों काली पोशाक में विरोध, प्लेकार्ड और वेल में घुसने की कोशिशें देखने को मिलीं।
बाहर संसद परिसर में भी INDIA गठबंधन और NDA सांसदों के बीच आमना-सामना हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार कई बिल लाने की तैयारी में है, लेकिन फिलहाल विधायी कामकाज लगभग ठप पड़ा है। सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला है।
जंतर मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। विपक्षी नेता (राहुल गांधी समेत) प्रदर्शनकारियों के समर्थन में दिखे। पुलिस कार्रवाई और इंटरनेट सस्पेंशन की खबरें भी आईं।
दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। विपक्ष इस्तीफे के बिना चर्चा नहीं चाहता, जबकि सरकार इस्तीफे को नकारते हुए खुली चर्चा की पेशकश कर रही है। राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं।












