नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और पदाधिकारियों की घोषणा कर दी। यह ऐलान जनवरी 2026 में नितिन नवीन के अध्यक्ष पद संभालने के कई महीनों बाद हुआ है। नियुक्तियां तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं।
पार्टी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी जगह दी गई है। खास बात यह है कि राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव का पद मिला है।
मुख्य नियुक्तियां…
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (13):
– वसुंधरा राजे सिंधिया (राजस्थान)
– तीरथ सिंह रावत (उत्तराखंड)
– राम माधव (दिल्ली)
– बैजयंत जय पांडा (ओडिशा)
– डी. पुरंदेश्वरी (आंध्र प्रदेश)
– रेखा वर्मा (उत्तर प्रदेश)
– वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी (गुजरात)
– डॉ. भारती प्रवीण पवार (महाराष्ट्र)
– मनप्रीत सिंह बादल (पंजाब)
– लाल सिंह आर्य (मध्य प्रदेश)
– प्रो. एम. नागराजा (कर्नाटक)
– प्रो. तारिक मंसूर (उत्तर प्रदेश)
– डॉ. मधुचंद्र कर (पश्चिम बंगाल)
राष्ट्रीय महासचिव (संगठन): बी.एल. संतोष (दिल्ली)
राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन): शिवप्रकाश (मुंबई) और सौदन सिंह (चंडीगढ़)
राष्ट्रीय महासचिव (8):
– विनोद तावड़े (महाराष्ट्र)
– सुनील बंसल (दिल्ली)
– बिप्लब कुमार देब (त्रिपुरा)
– स्मृति ईरानी (उत्तर प्रदेश)
– सतीश पूनिया (राजस्थान)
– गजेंद्र पटेल (मध्य प्रदेश)
– हरीश द्विवेदी (उत्तर प्रदेश)
– संजय भाटिया (हरियाणा)
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
राष्ट्रीय संयुक्त कोषाध्यक्ष: राजेश मंगल
इसके अलावा 16 राष्ट्रीय सचिवों की भी नियुक्ति की गई है, जिनमें कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, भोला सिंह, प्रदीप वर्मा, संदीप पाठक, फांगनोन कोन्याक, संगीता यादव आदि शामिल हैं।
क्या है खास…
राम माधव की वापसी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वे पहले राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और आरएसएस से जुड़े हैं। स्मृति ईरानी 2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट हारने के बाद संगठन में वापसी कर रही हैं। कई महिला नेताओं को प्रमुख पद दिए गए हैं। वसुंधरा राजे जैसी अनुभवी नेता भी टीम में शामिल हैं।
नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर नए पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई ऊर्जा देगी और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगी।
यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनावों (खासकर उत्तर प्रदेश) को ध्यान में रखते हुए किया गया माना जा रहा है।












