मध्य प्रदेश कैबिनेट ने UCC बिल को मंजूरी दी: जनजातीय समुदायों को छूट, विवाह-तलाक और संपत्ति पर समान कानून

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भोपाल : मध्य प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) के ड्राफ्ट बिल को कैबिनेट मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर (भोपाल के निकट) में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। बिल अब मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा, जो 20 जुलाई से शुरू हो रहा है।

मुख्य प्रावधान

जनजातीय समुदायों को पूर्ण छूट: अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) समुदायों को उनके अनोखे सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली की रक्षा के लिए UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। यह छूट उत्तराखंड और गुजरात जैसे अन्य राज्यों के मॉडल पर आधारित है।

विवाह, तलाक, संपत्ति और गोद लेने पर समान कानून: सभी नागरिकों (ट्राइब्स को छोड़कर) के लिए एक समान नियम लागू होंगे। बहुविवाह (पॉलीगैमी) पर प्रतिबंध, त्रिपल तलाक और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को अवैध और दंडनीय बनाया जाएगा। विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा (पुरुष 21 वर्ष, महिला 18 वर्ष)।

लाइव-इन रिलेशनशिप पर सख्त नियम: लिव-इन संबंधों का पंजीकरण एक महीने के अंदर अनिवार्य। 21 वर्ष से कम उम्र के मामले में माता-पिता/अभिभावकों को सूचित किया जाएगा और पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज होगा। विवाहित व्यक्ति द्वारा लिव-इन में जाने पर 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान।

संपत्ति, उत्तराधिकार और बच्चों के अधिकार: लड़के-लड़की को बराबर संपत्ति अधिकार। विवाह, लिव-इन, गोद लेने, सरोगेसी या ART से जन्मे बच्चों को समान कानूनी दर्जा।

सीएम मोहन यादव ने कहा, “राम और रहीम दोनों के लिए एक ही कानून होगा।” उन्होंने दावा किया कि ड्राफ्टिंग कमेटी (पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में) को 9 लाख से ज्यादा सुझाव मिले, जिनमें 80% मुस्लिम महिलाओं और 40% मुस्लिम पुरुषों का समर्थन शामिल है। यह महिलाओं के सशक्तिकरण और समान न्याय की दिशा में बड़ा कदम है।

इस मंजूरी के साथ मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद UCC लागू करने वाला चौथा राज्य बन गया है (गोवा में पहले से पुर्तगाली सिविल कोड लागू है)। बिल में कुल 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।2e64fa

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