नई दिल्ली/विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश की प्राकृतिक खेती की क्रांतिकारी पहल को विश्व स्तर पर सबसे बड़ा पर्यावरणीय सम्मान मिला है। Andhra Pradesh Community Managed Natural Farming (APCNF) कार्यक्रम को 2026 का प्रतिष्ठित Food Planet Prize (जिसे ‘फार्मिंग का ऑस्कर’ भी कहा जा रहा है) प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार स्वीडन की Curt Bergfors Foundation द्वारा दिया जाता है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरणीय पुरस्कार माना जाता है। पुरस्कार राशि 15 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 12.5-14 करोड़ रुपये) है।
पुरस्कार 2 जून 2026 को स्वीडन के Båstad में प्रदान किया गया। APCNF की ओर से Executive Vice Chairman विजय कुमार थल्लम ने यह सम्मान ग्रहण किया। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की विजन को इसमें विशेष रूप से सराहा गया।
APCNF मॉडल की उपलब्धियां
- 10 साल में 18 लाख किसान परिवार (1.8 मिलियन) और 8,000 से अधिक गांवों में पहुंच।
- 3.4 लाख महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) सक्रिय भूमिका में।
- 10,000+ कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (CRPs) द्वारा किसान-से-किसान प्रशिक्षण मॉडल।
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल लगभग समाप्त, मिट्टी स्वास्थ्य, जैव विविधता और जल संरक्षण में सुधार।
- अध्ययनों के अनुसार: किसानों की आय में 38-124% तक वृद्धि, पानी की खपत में 50% तक कमी, GHG उत्सर्जन में 46% तक कमी।
यह कार्यक्रम 2016 में शुरू हुआ था। इसका फोकस छोटे-सीमांत किसानों, महिला समूहों और पारंपरिक ज्ञान + आधुनिक मिट्टी विज्ञान पर आधारित प्राकृतिक तरीकों (जैसे साल भर कवर क्रॉपिंग, प्री-मानसून ड्राई सोइंग) पर है।
वैश्विक प्रभाव
यह मॉडल अब भारत के 22 राज्यों में अध्ययन/अपनाया जा रहा है। श्रीलंका और जाम्बिया जैसे देशों में भी इसका रेप्लिकेशन हो रहा है। APCNF को दुनिया की सबसे बड़ी एग्रोइकोलॉजी ट्रांजिशन में से एक माना जा रहा है। पुरस्कार जूरी ने इसे “नेचर-पॉजिटिव फार्मिंग” का स्केलेबल मॉडल बताया जो जलवायु लचीलापन, आय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ सुनिश्चित करता है।
विजय कुमार थल्लम ने कहा: “यह 18 लाख किसान परिवारों, 7 लाख कृषि मजदूर परिवारों और 3.4 लाख महिला समूहों को समर्पित है। हमारा लक्ष्य पूरे आंध्र प्रदेश के 60 लाख किसानों तक पहुंचाना है।”
यह पुरस्कार न सिर्फ आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे भारत के किसानों के लिए प्रेरणा है, जो रासायनिक खेती की समस्याओं (उच्च लागत, मिट्टी की बिगड़ती सेहत, जलवायु प्रभाव) से निपटने का वैकल्पिक रास्ता दिखाता है।












