राम मंदिर चंदा चोरी मामले में VHP की सख्त मांग: FIR दर्ज हो, फास्ट ट्रैक कोर्ट से दिन-प्रतिदिन सुनवाई

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अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस मामले में तुरंत FIR दर्ज करने, जांच तेज करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए दिन-प्रतिदिन सुनवाई की मांग की है। वहीं, कांग्रेस ने इसे ‘मोदी मॉडल’ करार दिया है।

पूरा मामला क्या है?

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे (donations) में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी, गायब हुए फंड, अनियमित गिनती, स्टोरेज लैप्स और सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने के आरोप लगे हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT गठित की थी। SIT ने 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की, लगभग 2 करोड़ रुपये नकद और सोना बरामद किया, और प्रारंभिक रिपोर्ट में 20-25 लोगों (मंदिर कर्मचारियों सहित) के खिलाफ FIR की सिफारिश की है।

SIT ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। अंतिम रिपोर्ट 10-15 दिनों में आने की उम्मीद है। ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों (जैसे काउंटर स्टाफ) पर आर्थिक अनियमितताओं, संपत्ति खरीद और सैलरी से अधिक संपत्ति के आरोप हैं।

VHP की मांग

VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 24 जून 2026 को स्पष्ट कहा:

  • FIR तुरंत दर्ज हो
  • जांच को तेज किया जाए।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट दिन-प्रतिदिन सुनवाई कर दोषियों को सख्त सजा दे।

VHP ने कहा कि यह भक्तों की आस्था और कड़ी मेहनत की कमाई का मामला है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए, भले ही वो कोई भी हो। VHP ने X (Twitter) पर भी इस मांग को पोस्ट किया।

कांग्रेस का हमला

कांग्रेस ने इसे ‘मोदी मॉडल’ बताया और समयबद्ध जांच की मांग की। विपक्षी दलों (समाजवादी पार्टी, कांग्रेस आदि) ने SIT पर सवाल उठाए, ट्रस्ट में कथित कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का जिक्र किया और CBI जांच की मांग की। कुछ याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में भी दायर हुई हैं।

ट्रस्ट और सरकार का पक्ष

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आंतरिक ऑडिट का हवाला दिया और कहा कि कोई बड़ी अनियमितता नहीं मिली। CM योगी आदित्यनाथ ने SIT जांच का समर्थन किया और कहा कि सच्चाई सामने आएगी।

आगे क्या?

SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद बड़े फैसले की उम्मीद है। यह मामला राम मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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