नई दिल्ली, 25 जून 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1975 की इमरजेंसी को भारत के लोकतंत्र के इतिहास का “सबसे अंधेरा अध्याय” बताया। ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर BJP और केंद्र सरकार के नेताओं ने इमरजेंसी को संविधान और लोकतंत्र पर हमला करार दिया। आज 25 जून को इमरजेंसी की 51वीं वर्षगांठ है, जिसे केंद्र सरकार ‘सम्विधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाती है।
इमरजेंसी की पृष्ठभूमि
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति की मंजूरी से पूरे देश में इमरजेंसी लगा दी थी। यह 21 महीने तक चली, जिसमें मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे के गिरफ्तार किया गया। जबरन नसबंदी और झुग्गी हटाने जैसे विवादास्पद कदम उठाए गए। BJP इसे लोकतंत्र की हत्या के रूप में याद करती है।
PM मोदी का बयान
PM मोदी ने X (पूर्व में Twitter) पर लिखा: “आज भारत के लोकतंत्र के इतिहास का सबसे अंधेरा अध्याय का 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने न केवल संविधान की भावना का उल्लंघन किया बल्कि लोकतंत्र को कैद कर दिया।” उन्होंने कहा कि संसद की आवाज दबाई गई, अदालतों पर नियंत्रण का प्रयास किया गया। उन्होंने इमरजेंसी का विरोध करने वाले हर व्यक्ति को सलाम किया।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
- अमित शाह: गृह मंत्री अमित शाह ने इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र पर हमले की निंदा की और कहा कि 25 जून को ‘सम्विधान हत्या दिवस’ मनाने का फैसला युवाओं को याद दिलाने के लिए है कि तानाशाही कैसे राष्ट्र को नुकसान पहुंचाती है।
- अन्य BJP नेता और मंत्री भी विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए, जहां उन्होंने कांग्रेस पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया।
केंद्र सरकार ने 2024 से 2026 तक दो वर्षों तक ‘सम्विधान हत्या दिवस’ मनाने का फैसला किया है, जिसमें देशभर में कार्यक्रम, सेमिनार और प्रदर्शनियां आयोजित हो रही हैं। NCERT की नई किताबों में भी इमरजेंसी को लोकतंत्र की चुनौती के रूप में शामिल किया गया है।
कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने BJP पर आरोप लगाया कि वे इमरजेंसी का मुद्दा उठाकर बेरोजगारी, महंगाई और अन्य मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज “अघोषित इमरजेंसी” है।












