अयोध्या: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे (दान-चंदा) में कथित अनियमितताओं और घोटाले की जांच तेज हो गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सौंप दी है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ जारी है। SIT ने कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को अयोध्या छोड़ने से रोक दिया है।
जांच की पृष्ठभूमि और SIT का गठन….
जून 2026 की शुरुआत में मंदिर के दान पात्रों (डोनेशन बॉक्स) से नकदी, सोना-चांदी के आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं में कथित गबन की खबरें सामने आईं। दावा किया गया कि लगभग 5 से 7.5 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 200 करोड़ तक) की राशि गायब है। दो कर्मचारियों के पास से नकदी बरामद होने और उनके अचानक संपत्ति खरीदने जैसे संदेहों के बाद मामला गर्माया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय SIT का गठन किया। टीम में शामिल हैं:
- IAS विजय विश्वास पंत (लखनऊ मंडलायुक्त)
- IPS किरण एस (IG)
- वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन
SIT को 15 दिनों में पूरी रिपोर्ट सौंपनी है। टीम ने अयोध्या पहुंचकर दान गिनती, रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन, CCTV फुटेज, भूमि सौदों और ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रियाओं की जांच की।
SIT की प्रमुख गतिविधियां
- पूछताछ: ट्रस्ट अधिकारियों, कर्मचारियों, बैंक स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों और 100-200 लोगों से पूछताछ। कुछ अधिकारियों ने सोना-चांदी के रिकॉर्ड पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
- रोक: SIT ने ट्रस्ट और मंदिर फंक्शनरी को अयोध्या छोड़ने से मना कर दिया है।
- खुलासे: दान प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा की कमी पाई गई। सोना-चांदी आदि की इन्वेंटरी में विसंगतियां सामने आईं।
- रिपोर्ट: SIT ने PMO और CM योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंपी। आगे FIR और कार्रवाई की संभावना। कुछ रिपोर्ट्स में ट्रस्ट में बदलाव और नए CEO की नियुक्ति का सुझाव भी।
ट्रस्ट ने आरोपों को मंदिर की छवि खराब करने की साजिश बताया है, जबकि विपक्ष ने राजनीतिक मुद्दा बनाया है।
मंदिर की दान प्रक्रिया
मंदिर में रोजाना 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। 35 दान पात्र हैं। रोजाना 8-13 लाख रुपये (कभी 50-60 लाख तक) जमा होते हैं। दो शिफ्ट में 20-20 कर्मचारी गिनती करते हैं।
SIT की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई, ट्रस्ट में सुधार और पारदर्शी सिस्टम लागू करने की उम्मीद है। यह मामला भक्तों के विश्वास से जुड़ा है, इसलिए जांच निष्पक्ष और तेज होनी चाहिए।












