नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय नवजात शिशु तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बेगमपुर के एक निजी अस्पताल की महिला डॉक्टर (मालिक), तस्कर, बिचौलिए और खरीदार शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान 5 नवजात शिशुओं (5 दिन से 4 महीने तक के) को रेस्क्यू किया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पिछले डेढ़ साल से सक्रिय था और गरीब परिवारों व ट्राइबल एरिया से नवजात बच्चों को खरीदकर या अन्य तरीकों से प्राप्त करके उन्हें दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों में बांझ दंपतियों को 6 से 10 लाख रुपये में बेचता था। जांच में अब तक 20 से 30 से ज्यादा बच्चों की तस्करी की पुष्टि हुई है।
कैसे काम करता था रैकेट?
- अस्पताल का रोल: बेगमपुर स्थित हीरा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल को इस रैकेट का हब बनाया गया था। अस्पताल की महिला डॉक्टर फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट, डिलीवरी रिकॉर्ड और इलाज के दस्तावेज तैयार करती थी।
- सप्लाई चेन: बच्चों को मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों से लाया जाता था। दलाल और मुख्य सप्लायर (एक को गुजरात से गिरफ्तार किया गया) इस काम को अंजाम देते थे।
- बिक्री: जरूरतमंद दंपतियों को लाखों रुपये में बेचा जाता था। कुछ बच्चे दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में बेचे गए।
पुलिस को एक सजग नागरिक (करोल बाग इलाके का) की सूचना पर इस रैकेट का पता चला। छापेमारी में तीन लाख रुपये से ज्यादा नकद भी बरामद किया गया।
दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि आगे की जांच जारी है और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है और उनकी देखभाल की जा रही है।













