नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च सोमवार को जंतर मंतर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च निकालने की कोशिश की, जिसके दौरान दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस घटना में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 10-15 लोगों को हिरासत में लिया गया।
CJP के इस आंदोलन की मांग परीक्षा में कथित अनियमितताओं (NEET पेपर लीक सहित) की जांच, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की है। आंदोलन जून 20 से जंतर मंतर पर चल रहा है.
सुबह से ही हजारों युवा, छात्र और समर्थक जंतर मंतर पर जमा हुए। भारी बारिश के बावजूद भीड़ उमड़ी। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके और अन्य नेताओं ने मार्च की तैयारी की। दिल्ली पुलिस ने पहले ही ‘चलो संसद’ मार्च को अनुमति नहीं दी थी और BNSS की धारा 163 के तहत न्यू दिल्ली जिले में प्रतिबंध लगा रखा था।
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। शास्त्री भवन के पास भी झड़प हुई। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित रहीं और कुछ मेट्रो स्टेशन बंद किए गए।
पुलिस ने दावा किया कि कोई भी बल प्रयोग नहीं किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का आरोप लगाया।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जारी
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, अभी भी अस्पताल में हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि अनशन जारी है। उन्होंने शर्त रखी कि अगर संसद सत्र में शिक्षा जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाए तो वांगचुक अनशन समाप्त कर सकते हैं। वांगचुक को स्वास्थ्य खराब होने पर सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था।
प्रतिक्रियाएं
CJP ने आंदोलन को “भारत का दूसरा आजादी आंदोलन” बताया। अभिजीत दीपके ने युवाओं को एकजुट रहने की अपील की। कई सेलिब्रिटी और नेता जैसे प्रकाश राज, शबाना आजमी आदि ने समर्थन जताया।
सरकार और पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की। आंदोलन शिक्षा सुधारों पर केंद्रित है और पूरे देश से समर्थन मिल रहा है।











