राहुल गांधी का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर तीखा हमला: अदानी को फायदा पहुंचाने का आरोप, रक्षा की आड़ में विनाश का विरोध, संस्थागत विद्रोह की चेतावनी

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नई दिल्ली, 6 जून 2026: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित ₹81,000 करोड़ के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने इसे रक्षा और ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के नाम पर “झूठ” बताया और आरोप लगाया कि यह असल में एक उद्योगपति (गौतम अदानी) को होटल, कैसीनो और रियल एस्टेट के लिए फायदा पहुंचाने का प्रोजेक्ट है।

राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा किया था और वहां की घनी वर्षावनों, प्राचीन कोरल रीफ्स और आदिवासी समुदायों को देखकर “disturbed” महसूस किया। उन्होंने X पर लंबा वीडियो पोस्ट कर कहा, “मोदी सरकार और भाजपा आपको बताती है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट रक्षा के बारे में है। यह नहीं है।”

मुख्य आरोप और बिंदु…

रक्षा की आड़ में फायदा: प्रोजेक्ट को रक्षा मजबूती बताने का विरोध। राहुल ने INS Baaz नौसैनिक अड्डे के विस्तार का समर्थन किया लेकिन कहा कि जंगल काटने की जरूरत नहीं — नौसेना की पुरानी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

पर्यावरणीय विनाश: 1.5 करोड़ से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे, प्राचीन कोरल रीफ्स नष्ट होंगे, चमड़े वाले कछुओं के घोंसले प्रभावित होंगे और अनमोल वर्षावन खतरे में।

आदिवासी और स्थानीय प्रभाव: आदिवासी समुदायों और बस्तियों की जमीन छीनी जा रही है। Forest Rights Act लागू नहीं हो रहा, उचित मुआवजा नहीं मिल रहा।

संस्थागत विद्रोह की चेतावनी: प्रोजेक्ट को “देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और अपराधों में से एक” बताया। उन्होंने इसे “विकास के नाम पर विनाश” करार दिया।

राहुल गांधी ने #GreenOverGreed कैंपेन शुरू किया और rahulgandhi.in/nicobar-matters पर याचिका दायर करने की अपील की।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, पावर प्लांट और टाउनशिप का विकास शामिल है। सरकार इसे मलक्का स्ट्रेट के पास रणनीतिक महत्व का बता रही है, लेकिन विपक्ष और पर्यावरणविद् बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय और सामाजिक नुकसान की चिंता जता रहे हैं।

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