दिल्ली जल बोर्ड ने यमुना पुनर्जीवन के लिए लगभग ₹4,500 करोड़ की परियोजनाओं को दी मंजूरी

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नई दिल्ली: यमुना को प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में दिल्ली जल बोर्ड ने अब तक के सबसे बड़े कदमों में से एक उठाया है। बोर्ड की 179वीं बैठक में लगभग ₹4,500 करोड़ की यमुना पुनर्जीवन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 15 नए विकेन्द्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी), सीवर नेटवर्क का विस्तार, मौजूदा प्लांटों का उन्नयन, स्लज प्रबंधन सुविधाएं और ड्रेनों का इन-सीटू ट्रीटमेंट शामिल हैं।

इन मंजूरियों के साथ दिल्ली जल बोर्ड अब कुल 28 डीएसटीपी पर काम करेगा। पहले 13 प्लांट स्वीकृत थे, अब 15 नए और जोड़े गए हैं। जल मंत्री एवं दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रवेश साहिब सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “लोग अक्सर पूछते हैं कि यमुना कब साफ होगी। इसका जवाब मजबूत बुनियादी ढांचे में है। जब तक दिल्ली में पैदा होने वाली हर बूंद सीवेज का उपचार नहीं होगा, नदी को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता।”

क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

वर्तमान में दिल्ली में रोजाना करीब 1,000 एमजीडी सीवेज पैदा होता है। सरकार के कार्यभार संभालने के समय क्षमता सिर्फ 749 एमजीडी थी, जिसे बढ़ाकर 814 एमजीडी किया गया। सभी 28 डीएसटीपी पूरा होने के बाद कुल शोधन क्षमता 1,041 एमजीडी हो जाएगी, जो वर्तमान उत्पादन से भी अधिक है।

श्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “दिल्ली के इतिहास में पहली बार हमारी सीवेज शोधन क्षमता शहर में पैदा होने वाले सीवेज से अधिक होगी। यह यमुना पुनर्जीवन के संकल्प की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि है।”

15 नए प्लांट और सीवर नेटवर्क

नए 15 डीएसटीपी की लागत करीब ₹2,000 करोड़ है। इनकी कुल क्षमता 103.5 एमजीडी होगी और करीब 20 लाख लोगों को फायदा होगा। ये प्लांट उन क्षेत्रों में बनेंगे जहां सालों से सीवर नेटवर्क अधूरा या अनुपस्थित है।

इसके साथ ही लगभग ₹1,600 करोड़ की लागत से 989 किलोमीटर नए सीवर नेटवर्क का निर्माण होगा। 244 कॉलोनियों और 57 गांवों के घरों को सीवर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। सभी 15 नए प्लांट 21 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं

मौजूदा एसटीपी की क्षमता 66 एमजीडी से बढ़ाकर 86.8 एमजीडी की जा रही है।

35 एमजीडी क्षमता का नया एसटीपी लगभग ₹918 करोड़ में विकसित होगा।

कोरोनेशन पिलर, केशोपुर, रिठाला, नरेला और रोहिणी स्थित 10 एसटीपी में स्लज प्रबंधन सुविधाएं (लागत ₹274 करोड़)।

दिल्ली गेट ड्रेन के इन-सीटू ट्रीटमेंट के लिए ₹65 करोड़ की परियोजना।

प्लांट संचालकों को उपचारित पानी की गुणवत्ता के आधार पर भुगतान की व्यवस्था।

श्री प्रवेश साहिब सिंह ने जोर देते हुए कहा, “यमुना केवल नारों से साफ नहीं होगी। वह तब साफ होगी जब हर घर सीवर नेटवर्क से जुड़ा होगा, हर बूंद सीवेज का उपचार होगा और हर ट्रीटमेंट प्लांट उच्चतम मानकों पर काम करेगा।”

दिल्ली जल बोर्ड का दावा है कि एक साल से भी कम समय में भूमि चिन्हांकन, डीपीआर, निविदा प्रक्रिया और आवंटन जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्य पूरे कर लिए गए हैं। अब धरातल पर परिणाम देने पर फोकस है।

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