दिल्ली सरकार ने कांवड़ यात्रा-2026 के लिए कांवड़ शिविरों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और महंगाई को देखते हुए यह संवेदनशील फैसला लिया गया है, ताकि शिविर संचालक श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं दे सकें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सबसे बड़ा बदलाव बड़े शिविरों के लिए किया गया है। अब 20,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में 6 से 12 दिन तक चलने वाले शिविरों को पहले के 11 लाख रुपये के बजाय 15 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। इसी तरह 3 से 5 दिन के बड़े शिविरों के लिए राशि 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी गई है।
अन्य श्रेणियों में भी बढ़ोतरी की गई है। 15,001 से 20,000 वर्गफुट वाले शिविरों के लिए 3-5 दिन की अवधि में सहायता 4 लाख से 8 लाख और 6-12 दिन में 7 लाख से 9 लाख रुपये की जाएगी। 10,001 से 15,000 वर्गफुट वाले शिविरों को 4 लाख से 6 लाख और 7 लाख से 8 लाख रुपये मिलेंगे। 5,001 से 10,000 वर्गफुट वाले शिविरों के लिए राशि 2.50 लाख से 3 लाख और 4 लाख से 5 लाख रुपये की जाएगी। छोटे शिविरों (5,000 वर्गफुट तक) को 1.50 लाख से 2 लाख और 2 लाख से 3 लाख रुपये दिए जाएंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया कि पहले की तरह कांवड़ समितियों को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा जारी रहेगी। अतिरिक्त खपत का खर्च संबंधित समिति को वहन करना होगा। बीएसईएस और टीपीडीडीएल समय पर कनेक्शन सुनिश्चित करेंगे।
अनुदान वितरण को और पारदर्शी व तेज बनाने के लिए प्रक्रिया सरल की जा रही है। अब दोनों किस्तें सीधे जिलाधिकारी कार्यालय से जारी की जाएंगी। राजस्व मुख्यालय से अलग-अलग मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। अनुदान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए दो किस्तों में दिया जाएगा—50 प्रतिशत अग्रिम और बाकी 50 प्रतिशत यात्रा के बाद सत्यापन के उपरांत। एसडीएम और तहसीलदार जियो-टैग फोटो तथा निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 में 170 कांवड़ शिविर थे, जो 2025 में बढ़कर 308 हो गए। बढ़ती जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत एमसीडी सफाई, स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा सुविधा, दिल्ली जल बोर्ड पेयजल, डूसिब मोबाइल शौचालय, बिजली कंपनियां निर्बाध आपूर्ति और दिल्ली पुलिस सुरक्षा व ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करेंगी।
समिति की सिफारिश के अनुसार 2025 में स्वीकृत समितियों और स्थलों की सूची ही 2026 के लिए अंतिम मानी जाएगी। नए शिविर या स्थलों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इन सभी प्रस्तावों को मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता बढ़ाना नहीं, बल्कि कांवड़ यात्रा को स्वच्छ, सुरक्षित और सुगम बनाना है, ताकि शिवभक्त आसानी से अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।












