बिहार की 103 वर्षीय बुजुर्ग महिला को 35 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिला इंसाफ: जमीन पर कब्जा वापस

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मोतिहारी (पूर्वी चंपारण), 16 जुलाई 2026: न्याय की राह कभी-कभी कितनी लंबी हो जाती है, इसका जीवंत उदाहरण बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड के मंगलापुर गांव से सामने आया है। 103 वर्षीय हबीबन खातून (पत्नी स्व. नईमुल्लाह अंसारी) को 35 साल लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अपनी 1 कट्ठा 4 धुर जमीन पर कब्जा मिल गया है। बुधवार को कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डुगडुगी बजाकर दखल-दहानी की कार्रवाई पूरी की।

यह विवाद वर्ष 1993-94 का है। हबीबन खातून के बड़े बेटे रहमतुल्लाह ने गांव के अफाक अहमद से अपनी मां के नाम पर यह जमीन खरीदी थी। रजिस्ट्री के कुछ ही दिनों बाद उनके चचेरे भाई लियाकत हुसैन ने भी उसी जमीन को खरीदने का दावा किया और कब्जा कर लिया। मार्च 1994 में हबीबन खातून ने मोतिहारी सदर मुंसिफ कोर्ट में लियाकत हुसैन और अन्य के खिलाफ मालिकाना हक का मुकदमा दायर किया (इजराए वाद संख्या 8/11)।

लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन विपक्ष ने जिला जज कोर्ट (2004) और फिर हाई कोर्ट (2014) में अपील की। सभी स्तरों पर हबीबन खातून को जीत मिली। 2014 में कब्जा दिलाने के लिए फिर कोर्ट गए, लेकिन मुंसिफों के तबादले और कोविड महामारी के कारण देरी हुई। आखिरकार हाल ही में कोर्ट ने कब्जा दिलाने का आदेश दिया।

कार्रवाई के दिन: मजिस्ट्रेट, राजस्व अधिकारियों और कल्याणपुर थानाध्यक्ष विनीत कुमार की मौजूदगी में करीब 300 पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ शांतिपूर्ण तरीके से दखल-दहानी हुई। गांव में डुगडुगी बजाकर कोर्ट का फैसला सुनाया गया। हबीबन खातून और उनके परिवार ने अदालत व प्रशासन का आभार जताया। परिवार का कहना है कि 35 साल का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ।

103 वर्षीय हबीबन खातून को जमीन पर कब्जा मिलते हुए, पुलिस-प्रशासन के साथ (भावुक परिवार के साथ)।

डुगडुगी बजाते हुए गांव का दृश्य या दस्तावेजों के साथ बुजुर्ग महिला।

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