केंद्र सरकार ने शुक्रवार (14 अगस्त 2026) को जनगणना 2027 के दूसरे चरण (Population Enumeration) के लिए 40 सवालों की सूची अधिसूचित कर दी है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी आदेश में जाति, रोजगार, माइग्रेशन, आधार और कोविड टीकाकरण जैसे सवाल शामिल हैं।
यह आजादी के बाद पहली बार है जब नियमित जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य जातियों की भी जानकारी दर्ज की जाएगी। जाति का कॉलम खुला रहेगा और व्यक्ति जो जाति बताएगा, वही दर्ज की जाएगी।
कब शुरू होगी गणना?
लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर 2026 तक होगी। देश के बाकी हिस्सों में यह फरवरी 2027 में होने की संभावना है। पहले चरण (घर सूचीकरण) का काम कई राज्यों में पूरा हो चुका है।
40 सवालों की पूरी सूची
व्यक्ति का नाम
परिवार के मुखिया से संबंध
लिंग
जन्म तिथि और आयु (पूर्ण वर्षों में)
वर्तमान वैवाहिक स्थिति
विवाह के समय आयु
जीवनसाथी का नाम
राष्ट्रीयता (घोषित अनुसार)
धर्म
अनुसूचित जाति (SC)/अनुसूचित जनजाति (ST)/जाति
पिता से संबंधित जानकारी
माता से संबंधित जानकारी
दिव्यांगता
मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति
शैक्षणिक संस्थान में उपस्थिति की स्थिति
उच्चतम शैक्षणिक स्तर और स्ट्रीम/विषय
पिछले एक साल में कभी काम किया या नहीं
आर्थिक गतिविधि की श्रेणी
व्यवसाय
उद्योग, व्यापार या सेवा की प्रकृति
कामगार का वर्ग
गैर-आर्थिक गतिविधि (सीमांत, अर्ध-सीमांत और गैर-कामगारों के लिए)
काम की तलाश या उपलब्धता (सीमांत, अर्ध-सीमांत और गैर-कामगारों के लिए)
काम के स्थान तक यात्रा
जन्म स्थान
अंतिम निवास स्थान
प्रवास (माइग्रेशन) का कारण
अंतिम प्रवास के बाद इस गांव/शहर में रहने की अवधि
स्थायी आवासीय पता
वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या (विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं के लिए)
अब तक जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या (विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं के लिए)
पिछले एक साल में जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या (वर्तमान में विवाहित महिलाओं के लिए)
कोविड-19 टीकाकरण का स्थान
बैंक खातों की कुल संख्या
मोबाइल नंबर (यदि उपलब्ध हो)
आधार नंबर (यदि उपलब्ध हो)
वोटर आईडी नंबर (यदि उपलब्ध हो)
पासपोर्ट नंबर (भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए)
ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?
जाति गणना: 1931 के बाद पहली व्यापक जाति गणना। इससे सामाजिक और आर्थिक नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
रोजगार और माइग्रेशन: काम की स्थिति, व्यवसाय और प्रवास के कारणों से रोजगार और शहरीकरण की तस्वीर साफ होगी।
डिजिटल और पहचान संबंधी: आधार, मोबाइल, बैंक खाते और कोविड टीका जैसी जानकारियां डिजिटल इंडिया और कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करेंगी।
यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी।
सरकार का कहना है कि ये आंकड़े नीति निर्माण, कल्याण योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे।












