अमेरिका का बड़ा दावा: भारत समेत 40+ देशों पर चीन को टैरिफ चोरी में मदद करने का आरोप

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अमेरिका ने गुरुवार को एक बड़ी रिपोर्ट जारी कर भारत समेत 40 से अधिक देशों पर आरोप लगाया है कि ये देश चीन को अमेरिकी टैरिफ चोरी में मदद कर रहे हैं। व्हाइट हाउस के ट्रेड एंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी ऑफिस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ में इसे ‘शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क’ करार दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन 2018 में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए सेक्शन 301 टैरिफ के बाद से तीसरे देशों के जरिए अपना माल अमेरिका भेज रहा है। इसमें माल को थोड़ा प्रोसेस करके, रीलेबलिंग, रीपैकेजिंग या रूट बदलकर मूल देश का नाम बदल दिया जाता है, जबकि असल में चीनी कंटेंट ही रहता है। इसे ‘कागजों में छिपा धोखा’ और ‘व्यापार के रूप में तस्करी’ कहा गया है।

भारत समेत किन देशों के नाम?

रिपोर्ट में 40 से ज्यादा देशों को तीन टियर में बांटा गया है:

टियर-1 (डायवर्सिफाइड स्केल लीडर्स): भारत, कनाडा, मेक्सिको, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और इजराइल। ये बड़े औद्योगिक देश हैं जहां ट्रांसशिपमेंट का जोखिम वैध व्यापार के साथ जुड़ा हुआ बताया गया है।

टियर-2: ब्राजील, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, तुर्की और वियतनाम।

टियर-3: बांग्लादेश, कंबोडिया, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, यूएई आदि।

पीटर नवारो (ट्रंप के वरिष्ठ ट्रेड सलाहकार) ने प्रेस ब्रीफिंग में सीधे भारत का नाम लिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे अमेरिका दूसरे देशों पर ऊंचे टैरिफ लगाएगा, भारत और वियतनाम जैसे देश भी ट्रांसशिपमेंट का रास्ता अपना सकते हैं।

रिपोर्ट में भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई कॉरिडोर का खास जिक्र है। इसमें दावा किया गया कि यहां चीनी पंप और कंप्रेसर आते हैं, जिन्हें भारतीय मूल का बताकर अमेरिका भेजा जाता है। नवारो का बयान था— “एक चीनी पंप जो पुणे से भारतीय बनकर निकलता है, वह सिनसिनाटी, डेटन या कोलंबस में नहीं बनाया जाता।”

आंकड़े कितने बड़े?

अवैध ट्रांसशिपमेंट का अनुमानित मूल्य: सालाना 40 अरब से 303 अरब डॉलर।
केंद्रीय अनुमान: लगभग 75 अरब डॉलर।
मेक्सिको, भारत और वियतनाम से 2025 में करीब 67 अरब डॉलर का माल ट्रांसशिप हुआ।
सिर्फ इन तीन देशों से अमेरिका को 28 अरब डॉलर का टैरिफ राजस्व नुकसान।
कुल राजस्व नुकसान का अनुमान: 19 से 26 अरब डॉलर सालाना।

अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, इंटीग्रेटेड सर्किट, एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स और मोटर कंपोनेंट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ने का दावा है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई

व्हाइट हाउस ने एआई आधारित ‘डिटेक्टिव बॉर्डर’ सिस्टम लगाने का ऐलान किया है। यह सिस्टम शिपमेंट डेटा, रूटिंग हिस्ट्री, प्रोडक्ट क्लासिफिकेशन, ओनरशिप लिंक और प्रोडक्शन कैपेसिटी का विश्लेषण करके असली मैन्युफैक्चरिंग और अवैध पास-थ्रू ट्रेड में फर्क बताएगा। सख्त एक्शन और पेनल्टी की भी बात कही गई है।

यह रिपोर्ट ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से कुछ हफ्ते पहले आई है। अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के बीच यह दावा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं को भी प्रभावित कर सकता है।

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