नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण। पासपोर्ट विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाता है और यह भारतीय नागरिकों की पहचान स्थापित करता है, लेकिन कानूनी रूप से नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं माना जाता।
यह स्पष्टीकरण 14वें Passport Seva Divas के मौके पर MEA के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिया गया। अधिकारी ने कहा, “पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का दस्तावेज नहीं। विदेश यात्रा के दौरान यह आपकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं है।”
यह बयान वोटर लिस्ट की विशेष तीव्र समीक्षा (Special Intensive Revision – SIR) के बीच आया है, जिसमें कई राज्यों में मतदाता सूचियों की जांच हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही Aadhaar को नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना था। MEA के बयान ने अब Aadhaar, Voter ID, राशन कार्ड जैसी अन्य पहचान दस्तावेजों पर भी चर्चा तेज कर दी है।
MEA अधिकारियों ने जोर दिया कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसके लिए पुलिस वेरिफिकेशन, Aadhaar आदि की जांच होती है। फिर भी, यह नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं है।
क्या है नागरिकता का प्रमाण?
- भारत में अभी National Register of Citizens (NRC) जैसा पूर्ण राष्ट्रीय रजिस्टर नहीं है।
- जन्म और माता-पिता के दस्तावेज (जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट आवेदन के समय माता-पिता के दस्तावेज) अक्सर नागरिकता साबित करने में मदद करते हैं।
- अदालतें भी पासपोर्ट, Aadhaar या Voter ID को अकेले नागरिकता का “conclusive proof” नहीं मानतीं।
यह स्पष्टीकरण कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा और सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छिड़ गई। कुछ लोग पूछ रहे हैं कि अगर ये दस्तावेज नागरिकता नहीं साबित करते तो फिर क्या साबित करते हैं?
MEA का फोकस
विदेश मंत्रालय नए ई-पासपोर्ट (चिप वाले) को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें बायोमेट्रिक डेटा शामिल है। इससे फ्रॉड कम होगा और वैश्विक स्वीकृति बढ़ेगी।












