नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलिमर या प्लास्टिक नोट्स लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा रहा है। RBI की नोट मुद्रण इकाई भारतीया रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने Rs 10 और Rs 20 के पॉलिमर नोट्स के लिए पॉलिमर सबस्ट्रेट शीट्स (BOPP आधारित) के सप्लाई के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। यह पायलट प्रोजेक्ट लोअर डिनॉमिनेशन नोट्स की बढ़ती मांग और तेजी से खराब होने वाली पेपर नोट्स की समस्या को हल करने के लिए किया जा रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट की मुख्य डिटेल्स
टेंडर विवरण: BRBNMPL ने लगभग 68,000 रीम्स (प्रति रीम 500 शीट्स) पॉलिमर सबस्ट्रेट की मांग की है, जो Rs 10 और Rs 20 दोनों डिनॉमिनेशन के लिए बराबर बांटी जाएगी। सब्सट्रेट में पहले से ही सुरक्षा फीचर्स जैसे क्लियर पोर्ट्रेट विंडो, मेटालिक न्यूमेरल, मैग्नेटिक थ्रेड, शैडो इमेज और इरिडेसेंट पैटर्न शामिल होंगे।
टाइमलाइन: बोलीदाताओं को 18 अगस्त 2026 तक प्रस्ताव जमा करने हैं। सफल पायलट के बाद अगले साल (2027) से व्यापक स्तर पर लॉन्च की संभावना है।
उद्देश्य: पेपर नोट्स की तुलना में पॉलिमर नोट्स 2-5 गुना ज्यादा टिकाऊ होते हैं, जो प्रिंटिंग लागत कम करेंगे और गंदे/फटे नोट्स की संख्या घटाएंगे। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जून 2026 में कहा था कि प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है और फायदे-नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
RBI के अनुसार, करेंसी प्रिंटिंग की लागत FY25 में बढ़कर Rs 6,372 करोड़ हो गई थी। छोटे नोट्स (Rs 10 और Rs 20) बार-बार इस्तेमाल के कारण जल्दी खराब हो जाते हैं, जबकि उनका सर्कुलेशन वैल्यू में कम (करीब 0.7-0.8%) है। पॉलिमर नोट्स लंबे समय तक चलते हैं, ATM में आसानी से काम करते हैं और काउंटरफिटिंग को भी मुश्किल बनाते हैं।
पिछला प्रयास
2012-2014 में RBI ने Rs 10 पॉलिमर नोट्स का फील्ड ट्रायल कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला में करने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी और ऑपरेशनल चुनौतियों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा प्रयास किया जा रहा है।
नोट: यह अभी पायलट स्टेज है। पेपर नोट्स अभी पूरी तरह वैध रहेंगे। कोई अचानक बदलाव या पुराने नोट्स वापस लेने की योजना नहीं है (PIB फैक्ट चेक के अनुसार फेक न्यूज से सावधान रहें)।












