अग्निपथ योजना में बड़े बदलाव की तैयारी: तीनों सेनाओं का प्रस्ताव, 25% से बढ़ाकर 50-75% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने पर विचार

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) में संभावित बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से विभाग ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA) को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें पहले बैच के अग्निवीरों की 4 साल की सेवा पूरी होने से पहले ही रिटेंशन रेट (स्थायी भर्ती प्रतिशत) बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

योजना की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित बदलाव

  • वर्तमान नियम: अग्निपथ योजना 2022 में शुरू हुई थी। इसके तहत 17.5 से 21 वर्ष (कुछ मामलों में 23 वर्ष तक) के युवाओं को 4 साल (6 महीने ट्रेनिंग + 3.5 साल सेवा) के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है। सेवा पूरी होने के बाद केवल 25% अग्निवीरों को स्थायी (permanent) सेवा में रखा जाता है। बाकी को सेना से रिलीज कर दिया जाता है, जिसमें एकमुश्त पैकेज (लगभग ₹11.71 लाख) और अन्य लाभ दिए जाते हैं।
  • नया प्रस्ताव:
    • नौसेना 70-75% अग्निवीरों को स्थायी रखने की मांग कर रही है, क्योंकि तकनीकी कौशल वाले सैनिकों में निरंतरता जरूरी है।
    • थलसेना और वायुसेना करीब 50% रिटेंशन का प्रस्ताव रखा है।
    • यह बदलाव पहले बैच (2022-23) के अग्निवीरों के 2026 में 4 साल पूरे होने से पहले लागू किए जा सकते हैं।

सेनाओं का मानना है कि 25% रिटेंशन बहुत कम है, जिससे प्रशिक्षित युवाओं का नुकसान हो रहा है। ऑपरेशनल अनुभव (जैसे Operation Sindoor) के आधार पर समीक्षा की जा रही है। सरकार ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन DMA और रक्षा मंत्रालय स्तर पर चर्चा चल रही है।

क्यों हो रहा है बदलाव?

  • पहला बैच 2026 में पूरा होने वाला है, जिसमें 30,000-35,000 अग्निवीर शामिल हैं।
  • सेनाओं को युवा प्रोफाइल बनाए रखते हुए अनुभव और विशेषज्ञता की जरूरत महसूस हो रही है।
  • इससे युवाओं में आकर्षण बढ़ेगा और विपक्षी आलोचना भी कम हो सकती है।

नोट: यह अभी प्रस्ताव है। अंतिम फैसला केंद्र सरकार लेगी। कोई सेवा अवधि बढ़ाने या अन्य बड़े संशोधन की पुष्टि नहीं हुई है।

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