ई20 पेट्रोल पर सरकार का स्पष्टीकरण: 10 मिथकों को खारिज, इंजन खराब होने की अफवाहें गलत

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ई20 इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और मिथकों का खुलकर मुकाबला किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 प्रमुख दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ई20 पेट्रोल इंजन को नुकसान नहीं पहुंचाता, वारंटी या इंश्योरेंस को प्रभावित नहीं करता और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।

सरकार ने ARAI (Automotive Research Association of India) और अन्य संस्थाओं के अध्ययनों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि वाहनों पर किए गए टेस्ट में कोई बड़ा नुकसान नहीं पाया गया।

सरकार द्वारा खारिज किए गए 10 प्रमुख मिथक:

  1. इंजन डैमेज और जंग: ARAI, IOC, Indian Institute of Petroleum और SIAM के संयुक्त अध्ययनों में धातु और प्लास्टिक पार्ट्स में कोई समस्या नहीं पाई गई। पुराने वाहनों के कुछ रबर पार्ट्स जल्दी बदलने पड़ सकते हैं, लेकिन इंजन सुरक्षित है।
  2. माइलेज में भारी गिरावट: ARAI ट्रायल्स (लगभग 40,000 किमी कारों में और 20,000 किमी टू-व्हीलर्स में) में सिर्फ मामूली बदलाव देखा गया। E20 के लिए कैलिब्रेटेड वाहनों में उच्च ऑक्टेन रेटिंग से फायदा हो सकता है।
  3. पानी की अत्यधिक खपत: एक लीटर इथेनॉल के लिए 10,000 लीटर पानी की अफवाह गलत। वास्तव में 3-5 लीटर प्रोसेस्ड पानी लगता है। जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम से पानी रिसाइकल होता है।
  4. वारंटी और इंश्योरेंस अमान्य: ऑटोमोबाइल कंपनियों और इंश्योरेंस कंपनियों ने स्पष्ट किया कि E20 के लिए डिजाइन या अप्रूvd वाहनों की वारंटी और इंश्योरेंस वैध रहेंगे।
  5. कीड़े-मकोड़े आकर्षित होते हैं: ईंधन-ग्रेड इथेनॉल में शुगर नहीं होता और डिनेचरेंट्स कीड़े भगाते हैं। पेट्रोल की गंध हावी रहती है।
  6. पानी टैंक में घुस जाता है: आधुनिक वाहन और पेट्रोल पंपों में वॉटर इंग्रेस को रोकने के सेफगार्ड्स हैं।
  7. ई20 अनटेस्टेड ईंधन: दशकों से अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और यूरोपीय देशों में इस्तेमाल हो रहा है।
  8. सुप्रीम कोर्ट में ‘एक्सपेरिमेंट’ कहा: कोर्ट में मामला प्रोक्योरमेंट से संबंधित था, नीति की मेरिट पर नहीं। अटॉर्नी जनरल के ऑफिस ने मीडिया रिपोर्ट्स को गलत बताया।
  9. गन्ने का जूस मिलाकर बनाया जाता है: वायरल वीडियो फर्जी हैं। ईंधन-ग्रेड इथेनॉल इंडस्ट्रियल प्रोसेस से बनता है।
  10. पर्यावरणीय नुकसान: प्लांट्स को पर्यावरण क्लीयरेंस जरूरी, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज अनिवार्य। कार्यक्रम से CO2 उत्सर्जन में कमी आई है।

E20 के फायदे:

  • विदेशी मुद्रा बचत: ₹1.9 लाख करोड़ से ज्यादा।
  • किसानों को भुगतान: ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक।
  • CO2 उत्सर्जन में कमी: लगभग 930 लाख मीट्रिक टन।
  • क्रूड ऑयल आयात में कमी: 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा (2014-15 से)।
  • भारत ने दिसंबर 2025 में 20% ब्लेंडिंग टारगेट समय से पहले हासिल कर लिया।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें और मिसइनफॉर्मेशन से बचें।

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