नई दिल्ली, 4 जुलाई 2026 – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को करीब ₹52,000 करोड़ की रक्षा खरीद प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी। इस फैसले से भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की लड़ाकू क्षमता और आधुनिकीकरण को बड़ा बल मिलेगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावों में स्वदेशी डिजाइन और विकसित प्रणालियों पर विशेष जोर दिया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Acceptance of Necessity (AoN) की मंजूरी के बाद अब इन प्रणालियों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
थल सेना के लिए प्रमुख मंजूरियां:
- AKASH TARANG एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम – ड्रोन हमलों से सुरक्षा।
- मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) सिस्टम – पैदल सेना की टैंक-रोधी क्षमता बढ़ाने के लिए।
- मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) – विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से बचाव।
- वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) – कम ऊंचाई वाले खतरों का मुकाबला।
- टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम (APS) – टैंकों की survivability बढ़ाने के लिए।
- जेट-पावर्ड कामिकाजी ड्रोन – सटीक हमले और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता।
नौसेना के लिए:
- मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन्स (MIGM)।
- नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (NSUAS)।
- इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड-बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF)।
वायुसेना के लिए:
- फिक्स्ड-विंग हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट्स (FW-HAPS) – लंबे समय तक ISR (Intelligence, Surveillance, Reconnaissance), सुरक्षित संचार और निरंतर निगरानी के लिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मंजूरी को देश की रक्षा क्षमता मजबूत करने और स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
यह फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारियों को और अधिक मजबूत करेगा।











